झांसी उत्तर प्रदेश से वरिष्ठ कवि श्रीकांत की बिटिया पर सुंदर रचना… पंखुड़ियों से बिखरे दल भाग कहाँ छूटे
श्रीकांत
259, सुभाषगंज
झाँसी, उत्तर प्रदेश
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बिटिया
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पंखुड़ियों से
बिखरे दल भाग कहाँ छूटे
उसका बिस्तर
उसका कमरा उसकी अलमारी
छूट गये ये गली मोहल्ले
संगी और यारी, पर
नीली आँखों वाली गुड़िया का मोह कहाँ छूटे

उसका हँसना
उसका रोना रूठ रूठ जाना
कभी ठुमकना
कभी मचलना मुश्किल से खाना
धान बिखेरी देहरी पर वह प्रीत कहाँ छूटे
आज सयानी बिटिया बोली
जाना अपने घर
पाहुन का संदेशा ले कर
आये हैं बादर
आम तरे हिंडोले का पर नेह कहाँ छूटे।
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सर्वाधिकार सुरक्षित।
प्रकाशित…..21/02/2021
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