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कवि तारा पाठक की एक कुमाऊनी रचना … मुसुलि बाना हैगे ज्वाना..

तारा पाठक
हल्द्वानी, उत्तराखंड

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कुमाउनी बाल कविता

मुसुलि बाना हैगे ज्वाना।
तली सारी, मली सारी
दौड़ लगें फुर फुर फुर।
मडु खें, मादिर खें,
कौणि खें कुर कुर कुर।
और खैजें धाना।
मुसुलि बाना।

टुपरि काटि, भकार उचेणें
र्वाटों की छापरि रघोणें।
सार घरै पधानी जसी
बिराऊ काटि जें काना।
मुसुलि बाना हैगे ज्वाना।

चीं चीं चीं चीं, चूं चू चूं चूं।
ताल खन, माल खन
धू धू धू धू।
संतै घर में यैकै राज
के गोठ के पाना।
मुसुलि बाना हैगे ज्वाना।

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