काव्य साहित्य वरिष्ठ कवि जीके पिपिल की दल बदल पर कुछ पंक्तियां…टकसाली सिक्के भी आजकल खोटे हो गये January 12, 2022 admin जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड ———————————————— दर्पण टकसाली सिक्के भी आजकल खोटे हो गये चेहरे भी अब चहरे न रहकर मुखौटे हो गये पहले नेता रहते थे जीवनपर्यन्त एक दल में आजकल के नेता भी बेपेंदी के लोटे हो गये।। Tags: कवि/शाइर जीके पिपिल, काव्य, साहित्य Continue Reading Previous कवि पागल फकीरा की ग़ज़ल … नासूर पर तो मरहम भी बेअसर से निकले …Next हरिद्वार धर्म संसद प्रकरण: एसआईटी ने दर्ज किए गवाहों के बयान More Stories national काव्य साहित्य कवि/गीतकार वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ” की ‘समय’ पर एक रचना May 13, 2026 Shabdradh national उत्तराखण्ड साहित्य डॉ. इन्द्रजीत सिंह की पुस्तक ‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का हुआ लोकार्पण May 13, 2026 Shabdradh उत्तराखण्ड देहरादून साहित्य तापस चक्रवर्ती की पुस्तक “हम्पी: उत्कर्ष से अपकर्ष तक” का हुआ लोकार्पण April 5, 2026 Shabdradh Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.