Fri. Jun 5th, 2026

वरिष्ठ कवि जीके पिपिल की दल बदल पर कुछ पंक्तियां…टकसाली सिक्के भी आजकल खोटे हो गये

जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड


————————————————

दर्पण

टकसाली सिक्के भी आजकल खोटे हो गये
चेहरे भी अब चहरे न रहकर मुखौटे हो गये
पहले नेता रहते थे जीवनपर्यन्त एक दल में
आजकल के नेता भी बेपेंदी के लोटे हो गये।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *