वरिष्ठ कवि/शा इर जीके पिपिल की ग़ज़ल … तलवे चाटता है और ख़ुद्दारी की बात करता है …
जीके पिपिल
देहरादून, उत्तराखंड

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गज़ल
तलवे चाटता है और ख़ुद्दारी की बात करता है
सबका अपना बनकर ग़द्दारी की बात करता है।
उसके पास किसी रोग का कोई इलाज़ नहीं है
वो बीमार करके तिमारदारी की बात करता है।
जिस दल ने दिये हैं मान, सम्मान और पद उसे
वो उसे ही डुबोने की तैयारी की बात करता है।
वो हर दल में सिर्फ़ स्वार्थ से ही आता जाता है
और चुनाव में जनता बेचारी की बात करता है।
उसको अब मैं, मेरा और मेरी शब्द ही पसंद हैं
गरज को हमारा और हमारी की बात करता है।
जब से उठी है बात आधी आबादी के हक़ों की
बस अपने परिवार की नारी की बात करता है।।
