काव्य साहित्य वरिष्ठ कवि जीके पिपिल का दल-बदल पर एक मुक्तक January 17, 2022 admin जीके पिपिल देहरादून, उत्तराखंड ——————————————————— दर्पण उचित चुनावी मान्यता उसका अपना मंत्र जहाँ से ज़्यादा टिकटें मिलें वही लोकतंत्र हर दल की खिचड़ी चखो दौड़ो यहाँ वहाँ मतदाता तो जन्म जात सबके सब परतंत्र। Tags: काव्य, दल बदल, मुक्तक, वरिष्ठ कवि जीके पिपिल, साहित्य Continue Reading Previous वरिष्ठ कवि जीके पिपिल की एक शानदार ग़ज़ल … फलों को हाथों से नहीं पत्थरों से तोड़ा गयाNext हरक सिंह रावत के कांग्रेस में शामिल होने पर कवि जीके पिपिल की चुटकी … More Stories national काव्य साहित्य कवि/गीतकार वीरेन्द्र डंगवाल “पार्थ” की ‘समय’ पर एक रचना May 13, 2026 Shabdradh national उत्तराखण्ड साहित्य डॉ. इन्द्रजीत सिंह की पुस्तक ‘गायिकी की गंगा लता मंगेशकर’ का हुआ लोकार्पण May 13, 2026 Shabdradh उत्तराखण्ड देहरादून साहित्य तापस चक्रवर्ती की पुस्तक “हम्पी: उत्कर्ष से अपकर्ष तक” का हुआ लोकार्पण April 5, 2026 Shabdradh Leave a Reply Cancel replyYour email address will not be published. Required fields are marked *Comment * Name * Email * Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.