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पटना बिहार से प्रसिद्ध साहित्यकार ऋचा वर्मा की एक लघु कथा… हिसाब

ऋचा वर्मा
अनिसाबाद, पटना
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हिसाब
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“आप यहां…. प्रणाम सर…”
“अरे… सुरेश बाबू, प्रणाम – प्रणाम..” श्री रमन प्रसाद जी को सब्जी वाले से यूं मोलभाव करते देख कभी उनके मातहत काम कर चुके सुरेश बाबू के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
“घर में बेकार ही बैठा रहता हूँ … सब्जी-भाजी खरीदने के बहाने कुछ चहलकदमी भी हो जाती है।” रमन प्रसाद जी ने सुरेश बाबू के शंका का समाधान सा किया…..।
बहुत ही रोबदार व्यक्तित्व परंतु हंसमुख स्वभाव वाले श्री रमन प्रसाद जी अपनी प्रशासनिक कुशलता और सहज व्यवहार के कारण पूरे विभाग में लोकप्रिय थे। सेवानिवृत्ति के बाद की जिंदगी के संबंध में भी उनके दृष्टिकोण बहुत ही सकारात्मक थे,
“सुरेश बाबू, इंसान अपनी असली जिंदगी तो सेवानिवृत्ति के बाद ही जीता है, नौकरी तो हम बस एक अच्छी जिंदगी जीने की तैयारियों में ही गुजार देतें हैं… मैंने भी पूरी तैयारी कर ली है….अपना घर, सरकारी पेंशन और बाल – बच्चों का साथ… एकदम राजयोग…. अभी तो नौकर हैं…. क्या समझे…. ” कहते हुए वे ठठा कर हंस दिया करते।
“कहिये बाबू, मटर तौल दूं, देसी हैं, एकदम ताजे..” सब्जी वाले की बातों से सुरेश बाबू की तंद्रा टूटी।
“रूको, अभी आता हूँ।” कहते हुए वे प्रसाद साहब की ओर मुखातिब हुए,
“चलिए सर, पान खाया जाये।”
प्रसाद साहब पान के शौकीन थे, दोनों ने पान खाया और आदतन प्रसाद साहब ने पैसे चुकाये।
“ठीक है सर, फिर मिलतें हैं कभी…।”
“एक मिनट, सुरेश बाबू…”
“जी सर…”
“एक दस रुपए का नोट है तो दे दीजिए….. उधार.. वह क्या है न बहू ने गिनकर पैसे दिये थे सारे पैसे खत्म हो गये… हिसाब की बहुत पक्की है। “एक फीकी मुस्कान के साथ उन्होंने कहा।
ऑटो किराया के पैसे साहब ने पान पर खर्च कर दिए थे।
“सर… ऐसा मत कहिये…” सुरेश बाबू इतना ही कह पाये।
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नाम: ऋचा वर्मा
शिक्षा: स्नातक, अंग्रेजी साहित्य
पता: ऋचा वर्मा
एल – 14, लखन अपार्टमेंट, रोड नंबर -39 अनिसाबाद, पटना, बिहार पिन- 800002
संप्रति: बिहार सरकार में कार्यरत
प्रकाशन: विभिन्न समाचार पत्रों यथा, हिंदुस्तान, प्रभात खबर-सुरभि, ज्ञान सवेरा, हरियाणा प्रदीप, विजय दर्पण टाइम्स, सौरभ दर्शन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका आधारशिला, गृहस्वामिनी, भाषा सहोदरी, अयन प्रकाशन, उद्दीप्त प्रकाशन, लघुकथा संकलन: दृष्टि, क्षितिज, समय की दस्तक, स्त्री का आकाश, साहित्य कलश, आचार्य पथ स्मारिका व अन्य साझा संकलनों में रचनाएं प्रकाशित। निबंध, आलेख, व्यंग्य, कहानी, लघुकथा व कविता आदि विधाओं में लेखन एवं प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित। रेडियो बोल हरियाणा, बोलता साहित्य एवं हेलो फेसबुक कवि सम्मेलन इत्यादि माध्यम से रचनाएं प्रसारित।
रुचि : उत्कृष्ट साहित्य पढ़ना और लेखन
उपलब्धि: उद्दीप्त प्रकाशन द्वारा काव्य किरण, साहित्य शिखर, लघुकथा श्री व काव्य श्री सम्मान, विश्व हिंदी उत्सव मॉरीशस -2019 के अवसर पर हिन्दी गौरव सम्मान, सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच एवं भाषा सहोदरी द्वारा हिन्दी साहित्य में योगदान हेतु, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा हिंदी दिवस 2020 के अवसर पर हिंदी सेवी सम्मान द्वारा सम्मानित। वर्तमान में राइजिंग बिहार समाचार पत्र में साहित्य पृष्ठ की उप संपादिका (अवैतनिक)।
मोबाइल : 8969643173 9472046603
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सर्वाधिकार सुरक्षित।
प्रकाशित…..28/12/2020
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